मोहम्मद उमर अशरफ़ 

3 जुलाई, 1988 को अमेरिकी यु’द्ध’पोत विसिनेंस से ईरानी एयरलाइंस के यात्री विमान IAF 655 पर दो मि’साई’ल दा’ग़ी गई। इस विमान हा’दसे में विमान में सवार सभी 290 निर्दोष यात्रियों की मौ’त हो गई।

ईरानी एयरलाइंस का यह विमान दुबई की उड़ान पर था; जब खाड़ी क्षेत्र के ऊपर अमेरिकी सेना ने इसे F-14 लड़ा’कू विमान समझकर मा’र गिराया।

ज्ञात रहे के F-14 लड़ाकू विमान 1979 में ईरानी क्रांति से पहले अमेरिका ने ही ईरान को बेचा था।

ईरान ने इस हादसे को ‘आ’परा’धिक कार्रवाई’, ‘ज़ुल्म’ और ‘नर’संहा’र’ कहकर इसकी आ’लोचना की, जबकि, अमेरिका लगातार इसे पहचान की ग़लती से हुआ हाद’सा बताता रहा।

इस मुद्दे को लेकर 1996 में ईरान ने अमेरिका के ख़िला’फ़ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मामला दाखिल किया। जिसके बाद अमेरिका ने मा’रे गए लोगों के परिवार वालों को हर्जाना दिया; पर माफ़ी मांगने से इंकार कर दिया।

2 अगस्त 1988 को बुश सीनियर, जो उस समय अमेरिका के उप राष्ट्रपति थे, नें हादसे पर बयान दिया ‘मैं और अमेरिका इस हादसे पर किसी से कोई माफ़ी नहीं मांगेंगे, हमें इसकी कोई चिंता नहीं कि इस हाद’से की वजह क्या थी, हम लगातार यह कह रहे हैं कि यह हा’दसा भूलवश हुआ है’

अब यूक्रेनियन इंटरनेशनल एयरलाइंस फ्लाइट 752 को ईरान ने मा’र गिराया. यह विमान यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ जा रहा था. इसमें 167 पैसेंजर और चालक दल के नौ सदस्य थे. इस फ़्लाइट में ईरान के 82, कनाडा के 13 और यूक्रेन के 11 नागरिक सवार थे. इस हा’दसे में विमान में सवार सभी 176 लोगों की मौ’त हो गई थी. और इसके लिए ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी और ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने खेद जताया और मांगी माफ़ी है.

वैसे 17 जुलाई 2014 को मलेशियाई एयरलाइंस के यात्री विमान MH-17 को यूक्रेन के आसमान में मा’र गिराया गया था. इस दुर्घ’टना में विमान में सवार क्रू मेंबर सहित सभी 298 लोगों की मौ’त हो गई, पर इसका ज़िम्मेदार कौन था ?? कौन ?