बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के यमन संघर्ष में शामिल होने के बावजूद इस साल की पहली छमाही में मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को जर्मनी के हथियारों का निर्यात काफी बढ़ गया है।
इस साल की पहली छमाही के लिए सरकार की हथियारों के निर्यात की रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र € 800 मिलियन ($ 880 मिलियन) के साथ जर्मन हथियार उद्योग का दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक बन गया है।
वहीं U.A.E.  हथियारों के निर्यात के लिए € 206 मिलियन ($ 226 मिलियन से अधिक) से अधिक की बिक्री को मंजूरी देने के साथ बर्लिन के सबसे बड़े ग्राहकों में छठे स्थान पर रहा।
चांसलर अंगेला मैर्केल की रूढ़िवादी-वाम गठबंधन सरकार ने पिछले साल यमन के गृहयुद्ध में हस्तक्षेप करने वाले देशों को हथियारों के निर्यात को रोकने का वादा किया था।
सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण, इस वर्ष की पहली छमाही में अपने नाटो साझीदार तुर्की को जर्मनी के हथियारों का निर्यात बहुत निचले स्तर पर रहा। बर्लिन ने अंकारा को हथियारों की कीमत लगभग € 26 मिलियन ($ 28.6 मिलियन) की बिक्री को मंजूरी दे दी, जो कि अल्जीरिया के लिए जर्मनी के निर्यात से कम है।