तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तुत अरब-इज’रायल संघर्ष को हल करने के लिए पेश की गई ‘डील ऑफ सेंचुरी’ को नकार दिया। उन्होने कहा, यह प्रस्ताव फिलिस्तीनी क्षेत्रों के इज’रायल के क’ब्जे को ‘वैध बनाने’ का एक प्रयास है।

बुधवार को एक साक्षात्कार में एदोगन ने कहा, “यह फिलिस्तीनियों के अधिकारों को नजरअंदाज करने और इज’रायल के क’ब्जे को वैध बनाने की योजना है।” उन्होने कहा, फिलिस्तीन के लोग और उनकी भूमि बिक्री के लिए नहीं है।

तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा, “यरूशलम मुस्लिमों के लिए पवित्र है और ट्रम्प की येरुशलम को इज’रायल छोड़ने का प्रस्ताव शांति प्रस्ताव कभी भी स्वीकार्य नहीं है।” राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि योजना फिलिस्तीनियों के अधिकारों की अनदेखी करती है और इज’रायल के क’ब्जे को वैध बनाने का प्रयास करती है। इस योजना से न तो शांति मिलेगी और न ही इस क्षेत्र में कोई समाधान होगा।

सोमवार को दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत का जिक्र करते हुए, “मैंने ट्रंप से उनके भाषण से पहले योजना का ब्योरा मांग लिया है ताकि हम उसके अनुसार स्थिति का निर्धारण कर सकें।” एर्दोआन ने यह भी संकेत दिया कि अगले सप्ताह इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की बैठक मुस्लिम देशों के मुद्दे पर नजरिया तय करेगी।

इससे पहले तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा कि “हम हमेशा फिलिस्तीन के भाईचारे के लोगों के साथ खड़े रहेंगे। हम फिलिस्तीनी भूमि के भीतर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन के लिए काम करना जारी रखेंगे।”