तुर्की के यूरोपीय संघ के मामलों के मंत्री उमर सेलिक ने फ्रेंच के लोगों को फटकार लगाई थी. जिन्होंने तुर्की को  फ्रेंच घोषणापत्र में कुरान की आयतों को हटाने के लिए तुर्की को प्रस्ताव दिया था. इस घोषणापत्र को पढने के बाद तुर्की ने ना सिर्फ फ्रेंच घोषणापत्र की निंदा की बल्कि उन्हें कुरान में अपनी दखलंदाजी करने के लिए भी सख्त मनाही की है.

मिडिल ईस्ट मॉनिटर के मुताबिक, इन 300 प्रमुख फ्रांसीसी लोगों का कहना था कि, कुरान की कुछ आयतों में “कट्टरपंथ” से संबंधित चीज़ें है जिनका दाईश (ISIS) आतंकी फ़ायदा उठा रहे है. वहीँ तुर्की के मंत्री ने इस बेहूदा बयान पर ट्वीट रते हुए कहा कि, “यह बौद्धिक हिंसा और बर्बरता का सबसे आकर्षक उदाहरण है. “जो भी यह लोग हैं और जो भी वे अब तक कर रहे हैं, वे कट्टरपंथी इतिहास की शुरुआत में लिखे जाएंगे.” इनका धर्म इस्लाम हो ही नहीं सकता है क्योंकि इस्लाम “अमन” और “भाईचारे” का मज़हब है.

तुर्की का बड़ा फैसला 

तुर्की ने अपने विश्वविद्यालयों में अब फ़्रांसीसी भाषा के विभाग में नए छात्रों को दाख़िला नहीं देने का बड़ा फैसला लिया है. फ़्रांस के अधिकारियों ने क़ुरान से कुछ भागों को निकालने की मांग की थी और देश के शिक्षा केन्द्रों में तुर्की के अध्ययन विभागों को कम करने की बात कही थी. जिसके बाद तुर्की के उच्च शिक्षा बोर्ड ने यह निर्णय लिया है.

फ़्रांस के इस क़दम पर प्रतिक्रिया देते हुए एक वरिष्ठ तुर्क अधिकारी इमरुल्लाह इसलेर ने कहा है कि हम क़ुरान के बारे में फ़्रांसीसी अधिकारियों के ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयान की निंदा करते हैं. वरिष्ठ तुर्क अधिकारी का कहना था कि उच्च शिक्षा बोर्ड तुर्की की एक स्वायत्त संस्था है, जिसने फ़्रांसीसी अधिकारियों के इस तरह के बयानों के जवाब में यह क़दम उठाया है. इसलेर ने कहा, इस फ़ैसले के दूसरा कारण यह है कि फ़्रांसीसी विश्वविद्यालयों में ऐसे विभाग बहुत कम हैं, जहां तुर्की भाषा पढ़ाई जाती है. उन्हें अपने यहां तुर्कोलॉजी विभागों में वृद्धि करने की ज़रूरत है.

आपको बता दें कि, 21 अप्रैल को 300 प्रमुख फ्रांसीसी लोग, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोज़ी और पूर्व प्रधान मंत्री मैनुअल वॉल्स शामिल थे. उन्होंने फ्रांसीसी दैनिक ली पेरिसियन में प्रकाशित एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए और कुरान की कुछ आयतों को हटाने की मांग की, जिसमें उन्होंने दावा किया कि हिंसा और विरोधी संदर्भ शामिल हैं.