अमेरिका के प्रतिबंधों के जवाब में ईरान ने सोमवार को 2015 में हुए परमाणु समझौते को तोड़ दिया है। ऐसे में अब पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। वहीं चीन, रूस और समझौते में शामिल अन्य देशों ने ईरान के इस कदम के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया है।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने पुष्टि की कि ईरान समझौते से ज्यादा यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है। एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान (एईओआई) के प्रवक्ता बहरोज कमालवंडी ने कहा कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन 4.5% के पार पहुंच गया है।

कमालवंडी ने रविवार को कहा था कि ईरान को अपने बशर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए 5% यूरेनियम सवंर्धन की जरूरत है और तेहरान रिसर्च रिएक्टर के लिए 20% संवर्धन की आवश्यकता है।

इसी बीच फ्रांस ने इस तनाव को कम करने के लिए ईरान में अपना प्रतिनिधि भेजने का फैसला लिया है। वहीं व्हाइट हाउस से जारी बयान के मुताबिक, ईरान के इस कदम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की।

इस मुद्दे को लेकर मैक्रों ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से फोन पर करीब एक घंटे तक बात की थी। अब फ्रांस के प्रतिनिधि इस मामले पर चर्चा के लिए इमैनुएल बोनी ईरान जाएंगे।