इन दिनों तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान सुर्खियों में जबसे उन्होंने आया सोफ़िया को मस्जिद में तब्दील करने का बड़ा फैसला लिया है। इस निर्णय से ना सिर्फ तुर्क खुश है जबकि दुनिया के मुस्लिम और गैर मुस्लिम देश भी बेहद खुश है। लेकिन अभी क़तर को छोड़कर अरब देशों ने एर्दोगान के इस फैसले का समर्थन नही किया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, ईरान के सर्वोच्च नेता के एक वरिष्ठ सलाहकार ने रविवार को तुर्की को 86 साल बाद संग्रहालय के रूप में हागिया सोफिया मस्जिद को फिर से खोलने के लिए बधाई दी।

अली खामेनेई के सहयोगी अली अकबर वेलायती ने कहा, “हम इस महत्वपूर्ण इस्लामी सफलता के लिए तुर्की के लोगों को बधाई देते हैं।” वेलयाती ने हालिया टिप्पणियों के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ की भी आलोचना की जिन्होंने अंकारा से हागिया सोफिया को एक संग्रहालय में फिर से लाने का आग्रह किया।

वेलयाती ने जोर देकर कहा: उनके पूर्वजों ने दुनिया के सभी संग्रहालयों को चर्चों में बदल दिया। हागिया सोफिया, जो 500 वर्षों से एक मस्जिद है, कयामत तक मस्जिद के रूप में रहेगी।

इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी और प्रधानमंत्री इमरान खान भी हागिया सोफिया पर तुर्की राष्ट्रपति को बधाई दे चुके है। प्रधानमंत्री इमरान ने हागिया सोफिया को फिर से खोलने के लिए राष्ट्रपति एर्दोगन की भी जमकर तारीफ की और उन्हें बताया कि “लाखों पाकिस्तानियों ने इसे टेलीविजन पर लाइव देखा”।

उल्लेखनीय है कि 24 जुलाई, शुक्रवार को हागिया सोफिया ग्रैंड मस्जिद में 86 वर्षों में पहली बार जुमे की नमाज अदा की गई। हागिया सोफिया इस्तांबुल की विजय से 916 साल पहले एक चर्च के रूप में रही, और 1453 से 1934 तक, लगभग 500 वर्षों तक एक मस्जिद, और हाल ही में 86 वर्षों के लिए एक संग्रहालय के रूप में।

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