कुवैत के सांसदों ने पूर्वी तुर्किस्तान और भारत में मुस’लमा’नों के उत्पी’ड़’न को रोकने के लिए कुवैत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

27 सांसदों के एक समूह ने एक बयान पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उन्होंने उइगुर मुसलमानों के चीन के व्यवस्थित अभियान के खि’लाफ एकजुटता को रेखांकित किया। चीन पर तुर्क मुस्लिम समूह के खि’लाफ दमनकारी नीतियों को अंजाम देने और उसके धार्मिक, वाणिज्यिक और सांस्कृतिक अधिकारों को प्रतिबंधित करने का आ’रो’प है।

ह्यूमन राइट्स वॉच ने सितंबर की एक रिपोर्ट में बीजिंग के शिनजियांग में उइघुर मुस्लिमों के खि’लाफ “मानव अधिकारों के उल्लंघन के व्यवस्थित अभियान” को अंजाम देने का आ’रो’प लगाया।

इस बीच, कुवैती सांसदों ने भारत में मुसलमानों के खि’लाफ हालिया प्रतिबंधों पर चिं’ता व्य’क्त की। भारत में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं, पारसियों, सिखों, बौद्धों, जैनियों और ईसाइयों को नागरिकता देने के एक नए कानून के खि’ला’फ वि’रोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। जिसमे मुस्लिमों को नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है।

कार्यकर्ताओं ने कानून को भे”दभाव’पूर्ण कहा है, इस डर से कि इसका उद्देश्य भारतीय मुसलमानों का अनादर करना था। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस तरह के दावों को खारिज कर दिया है।

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