उज़बेकिस्तान की राजधानी ताश्क़ंद के शैखान अन्तहूर के इमाम ने बताया कि ताजेकिस्तान की मस्जिदों में 18 साल से कम किशोरों के प्रवेश पर लगा प्रति’बंध खत्म हो गया है।

आदिल खान कारी युनुस खान ओगली ने बताया कि अब जब कि 18 साल के किशोरों के मस्जिद प्रवेश पर लगा प्रतिबंध खत्म हो गया है तो हमें इस अवसर से अच्छी तरह लाभ उठाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति शौकत मीर ज़ियायोफ ने कहा है कि मस्जिद, आध्यात्मिक केन्द्र हैं और हम ने मस्जिद में पलने बढ़ने वाले बहुत से धर्मगुरु देखें हैं।

उज़बेकिस्तान में पूर्व राष्ट्रपति इस्लाम करीमोफ के सत्ताकाल में 18 साल से कम उम्र के किशोरों के मस्जिद में प्रवेश पर प्रतिबंध था और अगर कोई 18 साल से कम किशोर या किशोरी मस्जिद में घुस जाए तो उसके माता पिता को 750 डॉलर का हर्जाना देना पड़ता।

 

उज़बेकिस्तान में शौकत मीरज़ियायोफ के सत्ता में आने के बाद यह प्रतिबंध खत्म कर दिया गया।

लेकिन ताजेकिस्तान में अब भी 18 साल से कम आयु के किशोरों के मस्जिद प्रवेश पर प्रतिबंध है और सामाचारिक सूत्रों के अनुसार इस साल रमज़ान पवित्र महीने में इस कानून को कड़ाई के साथ लागू किया जा रहा है।

खबरों के मुताबिक़ रमज़ान का महीने शुरु होने के साथ ही राजधानी दोशंबा सहित ताजेकिस्तान के अधिकांश नगरों में सरकारी अधिकारी और सुरक्षा कर्मी मस्जिदों और उपासना स्थलों में 18 साल से कम आयु के बच्चों को घुसने से रोकते हैं।

आप के लिए यह जानना रोचक होगा कि उजबेकिस्तान और ताजेकिस्तान मुस्लिम बाहुल्य देश हैं।

ताजेकिस्तान में 90 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या है।