अरबी भाषा के समाचारपत्र रायुल यौम के प्रधान संपादक अब्दुल बारी अतवान ने इमारात के तटरक्षक बल के एक शिष्टमंडल की तेहरान यात्रा, वर्ष 2013 के बाद दोनों देशों के तटरक्षक बलों की बैठक के उद्देश्य से होने वाली पहली यात्रा है। यह यात्रा, संयुक्त अरब इमारात के विदेश मंत्री शैख़ अब्दुल्लाह बिन ज़ायद के माॅस्को के दौरे के बाद हुई है।

माॅस्को में कुछ सूत्रों का कहना है कि बिन ज़ायद ने रूस से ईरान व इमारात के बीच मध्यस्थता करने और दोनों देश के बीच वार्ता का चैनल खोलने का अनुरोध किया है। अतवान का कहना है कि संयुक्त अरब इमारात के नेता चाहे वे राजनितिज्ञ हों या सैनिक, इस नतीजे पर पहुंच चुके हैं कि ईरानियों की शहादत प्रेमी भावना के कारण, जिसका एक उदाहरण अमरीकी ड्रोन को मार गिराने और ब्रिटेन के तेल टैंकर को रोकने में दिखाई दिया, यमन युद्ध में किसी भी प्रकार की विजय मिलना संभव नहीं है और विशेष रूप से इस लिए भी कि यह युद्ध अपने पांचवें साल में दाख़िल हो रहा है।

इमारात के अधिकारी इसी तरह यह बात भी अच्छी तरह जानते हैं कि अगर क्षेत्र में कोई भी युद्ध शुरू हुआ तो उसकी मुख्य बलि वही बनेंगे। यही कारण है कि उन्होंने हर स्तर पर अपने समीकरणों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है।

रायुल यौम के प्रधान संपादक लिखते हैं कि रूसी मध्यस्थों के निकट सूत्रों का कहना है कि इमारात के अधिकारियों ने अपनी माॅस्को यात्रा में रूस से कहा है कि वे यह स्पष्ट संदेश दे दें कि इमारात, धीरे धीरे यमन से निकल जाएगा और वह चाहता है कि ईरान अपने हूसी घटकों से सिफ़ारिश करे कि वे इमारात पर अपने हमले बंद कर दें। उनके इस संदेश का ईरान ने स्वागत किया है।

ईरान की यात्रा करने वाला इमारात का शिष्टमंडल तकनीकी दल है लेकिन अरब क्षेत्रों में मामले इस तरह शुरू होते हैं, आज ब्रिगेडियर जनरल अलअहबाबी, कल इमारात के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शैख़ तहनून बिन ज़ायद और परसों शैख़ अब्दुल्लाह बिन ज़ायद तेहरान में दिखाई देंगे। बिन ज़ायद ने अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जाॅन बोलटन की तरह ईरान पर फ़ुजैरा में तेल टैंकरों को निशाना बनाने का आरोप नहीं लगाया था।