प्रसिद्ध अया सोफिया म्यूजियम को मस्जिद में बदलने के बाद अब तुर्की ने एक और चर्च को मस्जिद में बदलने का फैसला किया है. अया सोफिया के मस्जिद में रूपांतरण के ठीक एक महीने बाद पूर्व बीजान्टिन चर्च, जो वर्तमान में म्यूजियम था, को इस शुक्रवार को मस्जिद में बदलने की औपचारिक घोषणा कर दी है. देश के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित राष्ट्रपति एर्दोगान के एक फैसले में कहा गया है कि इस्तांबुल के चर्च ऑफ सेंट सेवोर इन चोरा, जिसे तुर्की में कारिय के नाम से जाना जाता है, को अब मस्जिद में बदल दिया जायेगा. यह चर्च प्राचीन शहर की दीवारों के पास स्थित है जो अपने शानदार मोज़ेक वर्क और भित्तिचित्रों के लिए दुनिया में प्रसिद्ध है. यह चौथी सदी में बनाया गया था, हालांकि 11वीं-12वीं सदी तक इस ईमारत का रूप बदला गया, उसके बाद से अब तक यह इमारत उसी रूप में है.

पहले यह ईमारत तुर्क शासन के दौरान मस्जिद थी, 1945 में इसे म्यूजियम में बदल दिया गया. पिछले साल को’र्ट के एक फैसले ने इस इमारत का म्यूजियम का आधिकारिक दर्जा ख़त्म कर दिया और इसके मस्जिद बनाए जाने की राह खोली. दुनिया भर में एर्दोगान के इस कदम को अपनी खोयी लोकप्रियता हासिल करने का हथकंडा माना जा रहा है. ग्रीस के विदेश मंत्रालय ने तुर्की के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि तुर्की एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र की सूचीबद्ध विश्व धरोहर के साथ अनैतिक और क्रूरता का व्यवहार कर रहे हैं.

ग्रीस मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि यह किसी समुदाय को उकसाए जाने के लिए किया गया काम है. हमने तुर्की से 21वीं सदी के अनुसार चलने और सभ्यताओं के बीच आपसी सम्मान, संवाद और समझ बनाने का आग्रह किया है. पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं को अनसुना करते हुए एर्दोगान अया सोफिया में 86 साल में पहली नमाज़ के लिए सैकड़ों प्रशंसकों के साथ शामिल हुए थे. इस दौरान 350,000 लोगों ने अया सोफिया में होने वाली पहली नमाज़ में शिरकत की थी. जबकि दुनिया भर में इस स्मारक को कई धर्मों की विरासत के तौर पर एक म्यूजियम बनाये जाने की मांग उठ रही थी.