SOURCE: SAUDI PRESS AGENCY

जेद्दाह: अल-मदीना ऐतिहासिक इस्लामी साइटों से समृद्ध है जो सऊदी अरब शहर में आने वाले ज़ायेरीन मदीने के  ऐतिहासिक स्थलों का दौरा ज़रूर करते है. यह शहर बताता है कि, किस तरह हमारे नबी ने इस्लाम को दुनिया भर में फैलाया था.

अरब न्यूज़ के मुताबिक, मदीना की ऐतिहासिक स्थलों में मस्जिद अल-क़िबलातेन या दो क़िब्लास की मस्जिद भी शामिल है, जहाँ हजारों की तादाद में जायेरीन आते है. राम्जानों में इस मस्जिद में आने वाले जायेरीनों की संख्या और भी बढ़ जाती है.

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अरब नामा को मिली जानकारी के मुताबिक, हिजरा के दूसरे साल के दौरान सावाद बिन ग़नम बिन काब ने इस मस्जिद को बनाया था. यह मुसलमानों के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वह जगह है जहां पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व) के लिए कुरानिक रहस्योद्घाटन किबले का रूख बदला गया था.

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आपको बता दें कि, किबला वोह जगह है जिस तरफ दुनिया भर के मुस्लिम रूख करके नमाज़ पढ़ते है.  पहले यरूशलेम में बैत अल-मुक़द्दस से काबे का रूख बदलकर मक्का में पवित्र काबा में हमेशा के लिए बदल दिया गया.

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अरब न्यूज़ के मुताबिक, यह शाबान की 15 तारीख को किया गया था, जब पैगंबर साहब ने जोहर की नमाज़ के दौरान अपने साथी का नेतृत्व किया, तो काबा की तरफ रूख करने का आदेश मिला. इस तरफ काबा दुनियाभर के मुसलमानों के लिए किबला रूख बन गया, हम सब किबला रूख करके ही नमाजें अदा करते है.

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आपको बता दें कि, इस मस्जिद का नाम इस घटना के नाम पर रखा गया था, क्योंकि दो किबले की मस्जिद थी, क्योंकि कुछ नमाजें जेरूसलम की तरफ रुख करके पढ़ी गयी और बाकी की काबा रुख.