नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई के जीवन पर आधारित फिल्म ‘गुल मकई’ को बनाने वाले निर्देशक एच ई अमजद खान मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर हुए 1979 के आ’तं’की ह’म”ले को लेकर फिल्म बनाने जा रहे है।

खान ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘मेरा मानना है कि आ’तंक की शुरुआत मक्का से हुई थी जब वर्ष 1979 में उसके मस्जिद अल हरम पर आ’तं’की ह’म’ला हुआ था और मस्जिद को कब्जे में लेने के बाद वहां गये करीब 10,000 जायरीन को मस्जिद के भीतर ही बंद कर दिया गया।’’ उन्होंने बताया कि बाद में सऊदी सेना ने अन्य देशों की सेनाओं की मदद से दो हफ्तों के खू’नी संघर्ष के बाद मस्जिद को आ’तं’कियों के क’ब्जे से मुक्त कराया तथा जिहादियों की अगुवाई करने वाले जुहेमन अल ओतयबी और उनके साले तथाकथित आखिरी पैंगबर (मेहदी) मुहम्मद अब्दुल्ला उल कहतानी को मा’र गि’राया।

अमजद खान का मानना है कि इस वारदात से अंतत: अल’कायदा की बुनियाद पड़ी। दिसंबर अंत में रिलीज होने जा रही फिल्म ‘गुल मकई’ भी महिला अधिकार विशेषकर उनके शिक्षा के अधिकार की ल’ड़ाई लड़ने वाली यूसुफजई के जीवन पर आधारित है जिनका पालन पोषण, पश्चिमोत्तर पाकिस्तान के स्वात घाटी में हुआ था जो उनकी कर्मभूमि थी। मलाला को वर्ष 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।

निर्देशक ने कहा कि वर्ष 2009 में स्वात घाटी को तालिबान के लड़ाकों ने अपने कब्जे में ले लिया और वहां के लोगों पर शरिया कानून थोप दिया। ऐसे में मलाला का संघर्ष महिलाओं के पूर्ण शिक्षा के अधिकार को लेकर था जिसके लिए वह इस्लामी आ’तंकि’यों के आंख की किरकिरी बन गई और मलाला की जान को ख’तरा हो गया। इसी संघर्ष के दौर में वह बीबीसी की उर्दू वेबसाईट पर ‘गुल मकई’ के फर्जी नाम से अपना ब्लॉग लिखकर महिलाओं के अधिकार की वकालत करने में जुट गई।