हज को लेकर भारत में फार्म भराना शुरू हो गए है। इसी बीच सऊदी अरब से हाजियों को झटका देने वाली खबर आई है। दरअसल, सऊदी अरब ने वीजा शुल्क में लगभग छह गुना बढ़ोतरी कर दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, अब सिंगल एंट्री वीजा पर अब 93 डॉलर से बढ़कर 533 डॉलर का खर्च आएगा, एक मल्टीपल एंट्री में 6 महीने के वीजा पर 800 डॉलर और एक साल के वीजा पर 1,333 डॉलर का खर्च आएगा। संशोधित वीज़ा शुल्क सभी पर्यटकों, धार्मिक या व्यापारिक आगंतुकों पर लागू होगा। हालांकि पहली बार यात्रा करने वालों को छूट दी गई है।

बताया जा रहा है कि यह योजना, वित्त और अर्थव्यवस्था के सऊदी मंत्रालयों की सिफारिश पर आधारित थी, जो 2 अक्टूबर को लागू हुई और नए इस्लामिक वर्ष की शुरुआत के साथ हुई। नए नियमों को तेल पर राज्य की निर्भरता को कम करने और आव्रजन शुल्क सहित अन्य क्षेत्रों में राजस्व बढ़ाने के लिए एक व्यापक अभियान के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

दूसरी ओर हज कमेटी की और से इस साल हज यात्रा करने के लिए आवेदन जमा 10 नवंबर तक की अवधि निर्धारित की गई है। इस बार हज यात्रा के लिए जीएसटी की राशि 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। महिलाओं के लिए खुशी की बात यह है कि वे बिना मेहरमा के अपने ग्रुप के साथ हज यात्रा कर सकतीं हैं। हज यात्रा पर जाने के लिए बेलिड इंटरनेशनल पासपोर्ट होना आवश्यक है।

साल 2020 में वही आजमीन हज के पाक सफर पर जा सकेंगे जिनके पास 20 जनवरी 2021 तक की वैधता का पासपोर्ट है। हज कमेटी ने एलान किया है कि आवेदक हज कमेटी की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन डाउनलोड कर सकते हैं। इसके बाद इन्हें वहीं ऑनलाइन भरा भी जा सकता है। यही नहीं, प्रदेश हज कमेटी के पास आवेदन जमा किए जा सकते हैं।

केंद्रीय हज कमेटी ने कहा है कि आजमीन हज के दौरान मक्का में ठहरने की श्रेणी का चयन सोच समझ कर करें। अगर एक बार श्रेणी भरने के बाद इसे बदलने का विकल्प आजमीन को नहीं दिया गया है। मदीने में ठहरने की दो श्रेणी अजीजिया और ग्रीन है। अजीजिया श्रेणी का किराया कम है। इस श्रेणी को चुनने वाले को मक्का के आसपास के इलाके में रखा जाता है और उन्हें हज के लिए बस से शहर आना पड़ता है। ग्रीन श्रेणी के आजमीन मक्का शहर में काबा शरीफ के करीब रखे जाते हैं और ये लोग पैदल ही काबा शरीफ पहुंच जाते हैं। इस श्रेणी का किराया अजीजिया से ज्यादा है।

केंद्रीय हज कमेटी के अनुसार आजमीन को एक बार फार्म में ये बात भरनी होगी कि कुर्बानी कहां करनी है। अगर केंद्रीय हज कमेटी के जरिए आजमीन कुर्बानी करना चाहते हैं तो इसके लिए कूपन लेना होगा। इसके बाद हज कमेटी खुद ही मक्का में कुर्बानी करती है। हज कमेटी के एलान के अनुसार एक बार कुर्बानी की प्रक्रिया भरने के बाद इसे बदला नहीं जा सकेगा।

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