चीन को आर्थिक स्तर पर झटका देने वाले देशों में अब सऊदी अरब भी शामिल हो गया है.सबसे बड़ी सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ ने चीन के साथ हुआ 10 अरब डॉलर का सौदा रद्द कर दिया है. अरामको ने चीन में रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स निर्माण के इस सौदे को इसलिए रद्द किया है क्योंकि पिछले कुछ महीनों से दुनिया भर में कोरोना वायरस लॉक’डाउन के चलते तेल की खपत और उसके कारण कीमतों में जबरदस्त गिरावट आई है. जाहिर है कि इससे सभी तेल कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. अरामको का इस बड़ी डील को अचानक रद्द करना चीन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. खबर है कि अरामको ने अपने चीनी साझेदारों के साथ इस वार्ता के बाद चीन के पूर्वोत्तर प्रांत लिओनिंग में निवेश बंद करने का फैसला किया है.

हालाँकि अरामको ने अभी इस संबंध में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. साझेदारों में से एक चाइना नॉर्थ इंडस्ट्रीज ग्रुप कॉर्पोरेशन या नॉरिनको ने भी इस मामले में कुछ कहने से इनकार किया है. तेल की खपत में दुनियाभर में कमी और कीमतों में भारी गिरावट ने दुनिया भर की तेल कंपनियों को अब तक के अधिकतम नुक्सान में धकेल दिया है. ऊर्जा कंपनियों के तेल की कम कीमतों और बढ़ते कर्ज के बीच 75 अरब डॉलर के डिविडेंड को बरकरार रखने के लिए अरामको अपने पूंजीगत खर्च में बड़ी कटौती की तैयारी कर रही है. सऊदी अरामको ने इस साल की शुरुआत में एक रिफाइनरी विस्तार परियोजना पर इंडोनेशिया की राज्य ऊर्जा कंपनी पर्टैमिना के साथ बातचीत की थी, लेकिन समझौते के बिना वार्ता समाप्त हो गई.