source: ARAB NEWS

जेद्दाह: एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक ने लोगों को सऊदी अरब में रेतीले तूफ़ान के दौरान पर्याप्त सावधानी बरतने की सलाह दी है, जिससे श्वसन संबंधी जटिलताओं सहित कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा कि रेतीला तूफ़ान सीधा शरीर के अंदर जाता है और फेफड़ों को नुक्सान पहुंचाता है.

अरब न्यूज़ के मुताबिक, किंग सऊद विश्वविद्यालय, रियाद में कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ सुल्तान अयूब मेयो ने कहा कि रेतीला तूफ़ान बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण का मुख्य कारण हैं, खासकर बुजुर्ग लोगों में.

अरब नामा को मिली जानकारी के मुताबिक, मेयो ने पिछले छः हफ्तों में सऊदी के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले सैंडस्टॉर्म यानी रेट के तूफ़ान की एक श्रृंखला का जिक्र करते हुए कहा, “रेतीले तूफ़ान से अवगत लोगों की बड़ी संख्या में एलर्जीय राइनाइटिस, नाक बहने, घुटने, खांसी, सीने में कठोरता, तीव्र अस्थमात्मक हमले, आंख की जलन, आंखों की लाली, सिरदर्द, नींद ना आना और मनोवैज्ञानिक गड़बड़ी जैसे समस्या होती है. “

उन्होंने कहा कि ये श्वसन लक्षणों के अलावा बच्चों और वृद्ध लोगों में अधिक आम हैं. इसलिए रेतीले तूफ़ान में बच्चे और बुज़ुर्ग ज्यादा सावधानी बरते और घर से बाहर ना निकले.

मेयो ने कहा कि, “रेट बुरी तरह से शरीर पर प्रभाव डालता है. “जो लोग उनके संपर्क में आते हैं वे वायु प्रदूषकों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि धूल के कण श्वसन तंत्र में प्रवेश करते हैं और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं.”

उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषक द्वारा प्रेरित श्वसन प्रणाली की बीमारियां कणों के संपर्क में धूल और अवधि के प्रकार से प्रभावित होती हैं. पर्यावरण संरक्षण एजेंसियों को अनावश्यक एक्सपोजर को कम करने के लिए रेतीले तूफ़ान के बारे में लोगों को पहले ही चेतावनी देनी चाहए ताकि वह अपने स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ ना होने दें.