शाह महमूद क़ुरैशी ने न्यूयार्क में राष्ट्रसंघ की महासभा के वार्षिक अधिवेशन में उस खबर का खंडन किया जिसमें कहा गया है कि इस्लामाबाद ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात से सहायता की मांग की थी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात से आह्वान किया है कि रुचि होने की स्थिति में वे पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर सकते हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की हालिया सऊदी अरब की यात्रा के दौरान घोषणा की गयी थी कि सऊदी अरब 10 अरब डालर की सहायता पाकिस्तान की करेगा।

यद्यपि पाकिस्तानी अधिकारी यह कह रहे हैं कि सऊदी अरब पाकिस्तान में निवेश करना चाहता है परंतु पाकिस्तान में सऊदी अरब के क्रिया- कलापों के दृष्टिगत कहा जा सकता है कि सऊदी अरब वहाबियत और वहाबी मदर्सों की मज़बूती पर यह पैसा खर्च करेगा और यह वह विषय है जिससे पाकिस्तान के बहुत से हल्कों में चिंता उत्पन्न हो गयी है।

आतंकवादी गुटों की राजनीतिक और आर्थिक सहायता बंद करने हेतु पाकिस्तान पर अमेरिका के दबाव और इमरान ख़ान की सऊदी यात्रा के दौरान 10 अरब डालर की सहायता की घोषणा को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि सऊदी अरब ने जो 10 अरब डालर की सहायता पाकिस्तान को देने की घोषणा की है वह इस देश में निवेश से कहीं अधिक इमरान ख़ान के नेतृत्व में पाकिस्तान की नई सरकार को बाकी रखने के लिए है।