सऊदी के एक बिज़नेस मोहनद फहम रियाद में वह फर्नीचर शोरूम चलाते है. उनके शोरूम में पहले प्रवासी काम करते थे लेकिन अब सऊदीयों को नौकरी देने के बाद उनका शोरूम चल भी पायेगा या नहीं.

फहम का कहना है कि उनका व्यापार पहले ही आर्थिक मंदी से जूझ रहा है. पहले खुदरा क्षेत्रों में ज़्यादातर विदेशी कर्मचारी यानी भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि देशों के प्रवासी काम करते थे. यह प्रवासी बेहद कम दामों में अच्छा काम करते थे लेकिन सऊदी सरकार के नए नियमों के तहत सऊदी उतने कम दामों में काम करने के लिए राज़ी नहीं है.

फहम ने बताया कि उन्होंने कुछ सऊदी सेल्समेन को ट्रेनिंग दी, लेकिन उन्हें कुछ सप्ताह बाद ही नौकरी से हटाना पड़ा. दरअसल, जिन्हें ट्रेनिंग दी गई थी, उनमें सिर्फ एक अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पित था जबकि बाकियों को शिफ्ट में काम करने में मुश्किल हो रही थी.

फहाम कहते हैं, ‘एक साथ सारी मुसीबतें आ गईं. एक तो हमें इस इलाके में ज्यादा रेंट देना पड़ रहा है, ऊपर से बिक्री वैसी हो नहीं रही और अब लागत बढ़ गई है. ऐसे में हमारा कारोबार पहले के मुताबिक और गिर गया है.

सऊदीयों के लिए नौकरियां बनाना क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अर्थव्यवस्था को बदलने और सऊदीयों की तेल पर निर्भरता को खत्म करना है.