बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस) ने अमेरिका को मई में परमाणु समझौते को छोड़ने के बाद ईरान पर फिर से लगाए गए प्रतिबंधों को खत्म करने का आदेश दिया है. न्यायाधीशों ने फैसला दिया कि अमेरिका को खाद्य, चिकित्सा और विमानन सुरक्षा उपकरणों सहित मानवतावादी वस्तुओं के निर्यात में “किसी भी बाधा” को हटाना पड़ेगा.

अमेरिका ने तर्क दिया कि यह निर्णय ईरान के लिए “हार” था और कहा कि यह मानवतावादी से संबंधित लेनदेन की अनुमति दे चुका है. आईसीजे के फैसले बाध्यकारी हैं लेकिन अदालत में उन्हें लागू करने की कोई शक्ति नहीं है.

यह संयुक्त राष्ट्र का मुख्य न्यायिक अंग है और सदस्य देशों के बीच कानूनी विवादों को सुलझाता है. लेकिन दोनों देशों ने अतीत में अदालत के फैसलों को नजरअंदाज कर दिया है.

ईरान ने कहा कि प्रतिबंधों ने ईरान और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध और कंसुलर अधिकारों की 1955 की संधि का उल्लंघन किया, जो विवादों पर आईसीजे अधिकार क्षेत्र को अनुदान देता है.

यह भी कहा गया है कि प्रतिबंधों को दोबारा लगाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा उद्धृत कारणों को निराधार कर दिया गया क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने बार-बार पुष्टि की थी कि ईरान और छह विश्व शक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित 2015 परमाणु समझौते की शर्तों का पालन कर ईरान का समर्थन कर रहे है.