भारत और संयुक्त अरब इमारात ने एक समझौता किया है, जिसके बाद अब यह दोनों देश डॉलर या किसी तीसरे देश की मुद्रा में व्यापार नहीं करेंगे। अबूधाबी में भारतीय दूतावास की रिपोर्ट के मुताबिक़, दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने पर सहमत हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, नई दिल्ली और अबूधाबी के बीच यह समझौता दो अरब यूएई दिरहम या 3500 करोड़ रुपय के व्यापारिक लेनदेन के लिए हुआ है।

भारत और यूएई के इस क़दम से निश्चित रूप से विश्व स्तर पर डॉलर की साख को एक बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि भारत, ईरान और रूस जैसे देशो के साथ पहले ही डॉलर को साइड लाइन करने के समझौते कर चुका है। दोनों देशों के स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने के फ़ैसले से दोनों की निर्भरता डॉलर जैसी किसी भी मुद्रा पर कम होगी।

भारतीय दूतावास के बयान में कहा गया है, इससे दोनों देशों की स्थानीय मुद्राएं मज़बूत होंगी और तीसरी मुद्रा पर निर्भरता से उत्पन्न विनिमय दर में अस्थिरता के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।

दोनों देशों ने ऊर्जा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष, रक्षा और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर विचार विमर्श किया है। 50 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के साथ दोनों देश एक दूसरे के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर हैं।

2017 में भारत ने संयुक्त अरब इमारात में सीधे तौर पर 6.6 अरब डॉलर का निवेश किया था, जबकि यूएई ने भारत में 5.8 अरब डॉलर का निवेश किया। 36 अरब डॉलर के साथ यूएई भारत को तेल निर्यात करने वाला छठा सबसे बड़ा देश है।