मक्का में भारी बारिश के चलते बहादुर तीर्थयात्रियों के दृश्य और काबा शरीफ के बहने वाले मिजाब वाटरपाउट सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुए. लोगों ने भारिश के दौरान खाना-ए-काबा में इबादत जारी रखी.

मिजाब के नाम से जाना जाने वाला जटिल पानी पाइप खाना-ए- काबा की छत पर तय होता है और ‘इस्माइल के पत्थर’ की ओर बढ़ता है, जिसे अक्सर कई इतिहास की हदीसों में बहुत विस्तार से वर्णित किया जाता है.

कई मुसलमानों के लिए, तीर्थयात्रा के दौरान बारिश का आना अल्लाह की तरफ से तोहफा समझा जाता है और मिजाब के माध्यम से गुजरने वाली बारिश को और भी ज़्यादा पाक माना जाता है.

आपको बता दें की मिसाब पहली बार काबा पर स्थापित किया गया था जब कुरैशी जनजाति ने मक्का पर शासन किया था. पिछले कुछ वर्षों में, मिजाब को नए पाइपों के साथ उसी विनिर्देशों के साथ प्रतिस्थापित किया गया था और सोने के साथ चढ़ाया गया.