संयुक्त अरब अमीरात में आबुधाबी की अदा’लत ने एक फर्म पर अ’वै’ध रूप से दर्जनों लोगों को नौकरी पर रखने के आरोप में 3 मिलियन दिरहम का जु’र्मा’ना लगाया है. इस फर्म ने 60 लोगों को अ’वै’ध रूप से काम पर रखा था. खास बात ये है कि ये सभी कामगार कंपनी के प्रायोजन के अधीन नहीं थे. इस मामले पर को’र्ट ने निचली अदा’लतों द्वारा दिए गए उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कंपनी के प्रत्येक कार्यकर्ता पर 50,000 दिरहम जु’र्मा’ना भरने का आ’देश दिया गया था. इस मामले की जां’च में फर्म को श्रम व् आप्रवासन का’नू’नों का उ’ल्लं’घन करते पाया गया. इसके लिए फर्म पर ये भारी भरकम जु’र्मा’ना लगाया गया है.

मु’द्दई ने अदा’लत से फर्म पर निवास व् वीजा कानू’नों का उ’ल्लं’घन करने का आरो’प लगाकर अधिकतम जु’र्माना लगाने की विनती की थी. इस मामले में अबू धाबी को’र्ट ऑफ़ फ़र्स्ट इंस्टेंस और अपी’लीय अदा’लत, दोनों ने दो’षी पाया, जिसके बाद आबू धाबी को’र्ट ने फैसला सुनाते हुए फर्म पर भारी भरकम जु’र्माना ठो’का है. बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात में श्रम कानू’न के तहत कोई भी कर्मचारी निर्धारित व्यवसाय के लिए ही काम कर सकता है. किसी और जगह पर या किसी और फर्म के लिए काम करना अप’राध है.

इसके अतिरिक्त, फर्मों को अपने रेजीडेंसी या वीसा परमिट ख़त्म होने के बाद यात्रा वीजा पर किसी भी व्यक्ति को देश में काम देना अप’राध है. देश में अ’वै’ध रूप से रहने वाले, रेजीडेंसी या वर्क परमिट ख़त्म होने पर भी देश में रहने वाले और ट्रेवल वीजा पर देश में दाखिल होकर काम करने वाले व्यक्तियों को काम पर रखना भी जु’र्म है. यदि कोई भी नियोक्ता या कंपनी गैर’कानू’नी रूप से काम करने वाले श्रमिकों को नौकरी पर रखती है तो उन्हें ऐसा पहली बार करने पर प्रति श्रमिक ढाई हजार का र्जु’मा’ना भरना होगा, वहीं अगर कंपनी इस गल’ती को दोहराती है तो उसे प्रति श्रमिक ढाई लाख जु’र्मा’ना देना अनिवार्य है.