तुर्की के राष्ट्रपति तय्यब एर्दोगान ने मंगलवार को कहा कि उनका देश अमेरिका द्वारा हथियारों के रूप में प्रतिबंधों के इस्तेमाल पर चुप नहीं रह सकता है, जबकि तुर्की संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अंकारा द्वारा हिरासत में रखे अमेरिकी ईसाई धर्म के ईसाई पादरी के भाग्य पर कड़ा रुख अपनाने को तैयार है.

मिडिल ईस्ट मॉनिटर के मुताबिक, एर्दोगान का कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका को पादरी, एंड्रयू ब्रूनसन के लिए कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए, जिसका आतंकवाद के आरोपों पर तुर्की में मुकदमा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को परेशान कर रहा है. अगस्त में, ट्रम्प ने तुर्की से आयातित एल्यूमीनियम और स्टील पर कर्तव्यों की दोगुनी राशि को अधिकृत किया. जिसकी वजह से तुर्की की अर्थव्यवस्था काफी प्रभवित हुयी.

तुर्की ने अमेरिकी कारों, शराब और तंबाकू के आयात पर टैरिफ भी दोगुना कर दिया है. वर्ल्ड न्यूज़ अरेबिया को मिली जानकारी के मुताबिक, एर्दोगान ने कहा की अमेरिका का सुलूक अब बर्दाश्त के काबिल नहीं रहा.

एर्दोगान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक भाषण में कहा, “हम में से कोई भी वाणिज्यिक समझौतों के मनमाने ढंग से रद्दीकरण और हथियारों के रूप में आर्थिक प्रतिबंधों पर चुप नहीं रहेंगे.”

तुर्की स्टील और एल्यूमीनियम के आयात पर टैरिफ बढ़ाने के फैसले के अलावा, ट्रम्प प्रशासन ने ब्रूनसन को मुक्त करने के लिए तुर्की पर दबाव डालने के अपने प्रयासों के तहत एर्दोगान कैबिनेट में दो शीर्ष अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए हैं.

एर्दोगान ने आगे कहा, “हम बराबर शर्तों पर एक रचनात्मक वार्ता आयोजित करके हमारी समस्याओं को हल करने के पक्ष में हैं.”