सऊदी अरब दुनिया में सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. यहाँ दुनिया में सबसे ज़्यादा तेल पाया जाता है. कुछ महीनों पहले सऊदी सरकार ने घोषणा की थी वह तेल के बाद अब सोलर एनर्जी यानी सौर ऊर्जा क्षेत्र में सबसे आगे निकलेगा जिसकी तैयारियां ज़ोरों पर थी लेकिन हाल ही में सऊदी का कहना है की यह योजना विफ़ल साबित हो गयी है.

द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, सऊदी अधिकारियों के हवाले से अखबार ने छापा है कि अब सरकार देश में अक्षय ऊर्जा के अधिक व्यावाहारिक विकल्पों पर काम कर रहा है. साथ ही उसने दुनिया के सबसे बड़े सोलर प्रोजेक्ट की योजना को फिलहाल टाल दिया है. इस सौर परियोजना के तहत साल 2030 तक 200 गीगावाट ऊर्जा का उत्पादन हो सकेगा.

सऊदी सरकार के एक वरिष्ठ सलाहकार ने बताया की, “यह योजना लोगों का ध्यान खींचने के लिए काफी है लेकिन वास्तव में इस योजना पर काम करना कतई आसान नहीं है.” वर्ल्ड न्यूज़ अरेबिया को मिली जानकारी के मुताबिक, अब इस परियोजना को लेकर कोई भी सक्रिय नहीं है. 200 अरब डॉलर की इस परियोजना में पार्टनर सॉफ्ट बैंक की तरफ से फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की गई है.

आपको बता दें की जापानी कंपनी सॉफ्ट बैंक ने सऊदी अरब के साथ मिलकर पहले ही इस योजना के लिए 100 अरब डॉलर का विजन फंड नाम से वेंचर तैयार कर लिया था. इसका मकसद देश के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में तकनीकी निवेश बढ़ाना रहा है.

सूरज की भरपूर रोशनी और रेगिस्तान की उपलब्धता के बावजूद अब तक सऊदी अरब सौर ऊर्जा क्षमताएं विकसित नहीं कर सका है. इसके बजाय देश मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन से प्राप्त ऊर्जा पर निर्भर है. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की योजना देश की तेल पर निर्भरता को कम करके अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दूसरी योजनायें बनाई थी जिसमें यह दुनिया की सबसे बड़ी योजना थी.

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