इस्लाम में क़ुरान-ए-पाक की इतनी अहमियत है इस बात से दुनिया का हर मुस्लिम शख्स वाकिफ है. लेकिन इन दिनों कुछ लोग कुरान-ए-पाक के खिलाफ साजिश करते नज़र आ रहे है. दरअसल इन दिनों कुछ ऐसे कुरान सामने आ रहे जिनके अल्फाजों में कुछ गलती नज़र आ रही है. इन जरा सी गलती की वजह से पूरे अल्फाज़ के मायने ही बदल जाते है.

याद रखे जब भी कुरान का हदिया लें तो किसी कुरान हाफ़िज़ को ज़रूर दिखाएं वरना अल्फाजों की एक छोटी से गलती ही मायेनों को पूरी तरह बदल देगी.

मिसाल के तौर पर हम सुरे अल-बक़र ले रहे है-

“ज़ालिकल किताबू लारायीबा फिही हुददल लिलमुत तकिनल्लज़ीना युमिनूना बिलगयिबी वयुकीमुनस-सलाता वमिममा रज़कनहुम युनफिकून”– इसके मयीने है;” वह किताब यही हैं, जिसमें कोई सन्देह नहीं, मार्गदर्शन हैं डर रखनेवालों के लिए जो अनदेखे ईमान लाते हैं, नमाज़ क़ायम करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें दिया हैं उसमें से कुछ खर्च करते हैं.”

लेकिन अगर हम गलती वाले सुरे- बकर को पढ़ें तो उसमें लिखा है- ” ज़ालिकल किताबू लारायीबा फिही हुददल लिलमुत तकिनल्लज़ीना लायुमिनूना बिलगयिबी युन्फिकूनस्सलाता वमिममा रज़कनहुम युकीमून”

वल्लाजीना यूमें नूना बिल्गैब , इसका मतलब है की “जो बिन देखे पर ईमान लाते है” इसमें सिर्फ लाम जोड़ने से पूरा मतलब बदल जा रहा है .. लाम जोड़कर यह मतलब बन रहा है ..”जो बिन देखे पर ईमान नही लाते.”

यह तो मिसाल के तौर पर सिर्फ कुछ अल्फाजों की गलतियाँ देखी गयी है. इस तरह की कई गलतियाँ पुरे कुरान शरीफ में हो सकती है इसलिए जब भी कुरान-ए- पाक का हदिया लें तो उसके किसी कुरान हाफिज को ज़रूर दिखाए. क्योंकि यह साज़िश इस्लाम को गुमराह करने के लिए की जा रही है इसलिए आपको सावधान रहने की ज़रूरत है और सही कुरान ख़रीदने की भी ज़रूरत है.