इस समय बहुत तेज़ी से विश्व समुदाय में बदलाव आ रहे हैं, जहाँ पिछले दिनों उज्बेकिस्तान में वैश्विक नेताओं की एक अलग जुगलबंदी देखने को मिली वहीँ दूसरी तरफ अमेरिका का सबसे ख़ास सहयोगी रहा सऊदी अरब भी उसे अपने खेमे से जाता हुआ नज़र आ रहा है. मिशन 2030 को लेकर सऊदी के क्राउन प्रिंस बहुत मेहनत से इसे पूरा करने में लगे हैं जिसे लेकर उन्होंने देशहित में कुछ ऐसे फैसले भी लिए हैं जो कुछ लोगो की नज़रों में खरा नहीं उतारते.

वही आज की जो खास खबर हम आपको बताने जा रहे हैं वो यह की अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने सऊदी अरब को चेता’वनी दी है कि तेल की उत्पादन को कम करने के ओपेक प्लस के फ़ैसले के ‘परिणाम’ होंगे.

ओपेक प्लस ने पाँच अक्तूबर को इस बात की घोषणा की थी कि तेल के उत्पादन में प्रति दिन 20 लाख बैरल की कमी की जाएगी.

अमेरिका ने बहुत कोशिश की कि तेल उत्पादन पहले की तरह जारी रहे और उसमें कमी नहीं की जाए, लेकिन सऊदी अरब समेत ओपेक प्लस के देशों ने अमेरिका की मंशा के उलट फ़ैसला किया.

आपको बताते चलने की OPEC प्लस तेल निर्यात करने वाले 23 देशों का समूह है. यह ग्रुप तय करता है की किस देश को कितना तेल बेचा जाये और बाज़ार में कितना.
यह समूह मिलकर यह तय करता है कि कितना तेल उत्पादन किया जाए और दुनिया के बाज़ार में कितना तेल बेचा जाए. इन देशों में सऊदी अरब सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है जो की डेली एक करोड़ बैरल तेल उत्पन्न करता हैं.

सीएनएन को दिए इंटरव्यू में बाइडन ने कहा, “उन्होंने (सऊदी अरब) रूस के लिए जो किया है, उसके कुछ नतीजे होंगे. मैं यह नहीं बताऊँगा कि मैं क्या सोच रहा हूँ और मेरे मन में क्या है. लेकिन उसके नतीजे ज़रूर होंगे.”

बाइडन के इंटरव्यू से ठीक एक दिन पहले सीनेट फ़ॉरेन रिलेशन्स कमेटी के चेयरमैन प्रभावशाली डेमोक्रेटिक सिनेटर बॉब मेनेन्डेज़ ने कहा था, “अमेरिका को सऊदी अरब के साथ अपने सभी संबंधों को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर देना चाहिए.”

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