द हिंदू रिपोर्ट के मुताबिक, दोहा स्थित निर्माण कंपनी में 550 से अधिक भारतीय प्रवासी कई महीनों कतर में फंसे हुए  है. एक समाचार रिपोर्ट से पता चला है कि, यह भारतीय प्रवासी इस कंपनी के लगभग 1,200 कर्मचारियों में से हैं और यह 526 कर्मचारी क़तर की मजदूरों की श्रेणी में आते हैं.

अल अरेबिया के मुताबिक, “पिछले सितंबर से लगभग 116 कर्मचारियों को उनकी सैलरी भजी नहीं मिली है. जिसकी वजह से इन भारतीय कर्मचारियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.  श्रम विंग में 1,100 कर्मियों को जनवरी से अपना वेतन नहीं मिला है, और दिसंबर से ओवरटाइम नहीं मिला है.  “एक कर्मचारी ने समाचार पत्र को बताया कि, हमें ना सलरी मिल रही है ना हमारे पास पैसे है हम क़तर में शरणार्थियों की तरह रह रहे हैं.

वर्ल्ड न्यूज़ अरेबिया को मिली जानकारी के मुताबिक, कर्मचारियों का कहना है कि, वे कंपनी पर आए संकट के पीछे की वजह नहीं जानते है.

पैसे ना होनी की वजह छोड़ना पड़ा घर 

कर्मचारियों का कहना है कि पैसे ना होने की वजह से किराया ना चुकाने के बाद कई श्रमिकों को घरों से बाहर निकाल दिया गया है और वे उन लोगों के कमरे साझा कर रहे हैं जिनके पास कंपनी क्वार्टर हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्मचारियों ने 1 अक्टूबर, 2017 को अपनी सैलरी के प्रबंधन को लेकर कंपनी को एक समूह मेल भेजा था, लेकिन इस अभी तक इस मेल का कोई जवाब नहीं मिला है. भारतीय श्रमिकों ने 10 मार्च को भारतीय दूतावास से याचिका दायर की लेकिन इसकी प्रतिक्रिया “नकारात्मक” थी. अब कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें भारत सरकार से ही उम्मीदें की वह हमारी मदद करेंगे.

आपको बता दें कि, भारतीय श्रमिकों ने 15 मार्च को पुलिस शिकायत दायर की और 25 मार्च को प्रशासनिक विकास, श्रम और सामाजिक मामलों के मंत्रालय (एमएडीएलएसए) से संपर्क किया. लेकिन अभी तक उनकी मदद नहीं की गयी है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने 10 अप्रैल तक का समय मांगा था लेकिन अभी तक कंपनी ने मामले को नहीं सुलझाया है.